उत्तराखंडउधम सिंह नगरबाजपुर

बेहतर ट्रैफिक प्रबंधन व पार्किंग सुविधाओं की जरूरत : यशपाल आर्य

बाजपुर की समस्याओं को लेकर आर्य ने धामी को लिखा पत्र

बाजपुरः नेता प्रतिपक्ष व क्षेत्रीय विधायक यशपाल आर्य ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को पत्र लिखा है। आर्य ने पत्र में कहा कि बाजपुर नगर, जो कि ब्रिटिश शासन काल में पेशकारी के रूप में स्थापित हुआ था, आज तराई-भाबर क्षेत्र में एक प्रमुख नगर के रूप में विकसित हो चुका है। भारत के विभाजन के पश्चात यह क्षेत्र शरणार्थियों के पुनर्वास हेतु चिन्हित किया गया था। इसी क्रम में वर्ष 1960-63 के मध्य तत्कालीन राज्य सरकार द्वारा बाजपुर क्षेत्र में राजस्व वर्ग 6(2) की बंजर व निष्प्रयोज्य भूमि को लीज पर आवंटित किया गया। यह आवंटन नगण्य शुल्क पर वैधानिक प्रक्रिया के तहत ट्रेजरी चालान के माध्यम से किया गया था।

उल्लेखनीय है कि विगत दशकों में इन लीजधारकों द्वारा समय-समय पर आवश्यक दस्तावेजों सहित लीज के नवीनीकरण की प्रक्रिया राज्य सरकार से विधिवत पूर्ण की जाती रही है। वर्ष 2024 में तत्कालीन जिलाधिकारी श्री उदयराज सिंह के सहयोग से यह प्रक्रिया पुनः संपन्न कराई गई, जिसे प्रशासनिक स्तर पर भी मान्यता प्राप्त है।
वर्तमान में लोक निर्माण विभाग द्वारा नगर में अतिक्रमण चिन्हित करने के नाम पर जो कार्रवाई प्रारंभ की जा रही है, वह न केवल असंगत प्रतीत होती है, बल्कि यह वर्ष 1960 से वैध रूप से काबिज दुकानदारों एवं नागरिकों के संवैधानिक अधिकारों का उल्लंघन भी करती है। कहीं 45 फुट, कहीं 50 फुट और कहीं 55 फुट की भिन्न-भिन्न मापदंडों के आधार पर लाल निशान लगाकर संपत्तियों को अतिक्रमण की श्रेणी में रखे जाने से न केवल भ्रम और भय का वातावरण उत्पन्न हो रहा है, बल्कि जनता में व्यापक असंतोष एवं आक्रोश भी देखा जा रहा है।
इस संदर्भ में यह भी स्मरणीय है कि जी-20 सम्मेलन के अवसर पर राज्य सरकार द्वारा शहरी क्षेत्रों में ‘नाले से नाले तक’ की नीति अपनाकर सौंदर्यीकरण की योजना को सफलतापूर्वक लागू किया गया था। ऐसी नीति को यदि यहां भी समान रूप से लागू किया जाए, तो सौंदर्यीकरण एवं यातायात व्यवस्था दोनों में संतुलन सुनिश्चित हो सकता है।
मुख्य बाजार की सड़कें वर्तमान में पर्याप्त चौड़ाई (लगभग 60 फीट) की हैं, जहां सामान्य यातायात में किसी प्रकार की बाधा नहीं है। असली समस्या अव्यवस्थित पार्किंग से उत्पन्न हो रही है, जिसे केवल बेहतर ट्रैफिक प्रबंधन व पार्किंग सुविधाओं के माध्यम से ही हल किया जा सकता है।
यह भी स्पष्ट किया जाना आवश्यक है कि उक्त भूमि पर लीजधारकों की उपस्थिति राज्य सरकार की विधिसम्मत स्वीकृति एवं दस्तावेज़ों के आधार पर है। इसलिए इस भूमि को ‘अतिक्रमण’ की श्रेणी में दर्शाना न केवल न्याय के विरुद्ध है, बल्कि यह संवेदनहीन प्रशासनिक दृष्टिकोण को भी उजागर करता है।
आर्य ने विभिन्न बिन्दुओं पर निवेदन कियाः
बाजपुर नगरपालिका क्षेत्र में ‘नाले से नाले तक’ की नीति को अपनाकर मानकों में एकरूपता सुनिश्चित की जाए।
राज्य सरकार द्वारा वैध रूप से पट्टे पर दी गई भूमि को ‘अतिक्रमण’ की श्रेणी से बाहर रखा जाए।
अवैध पार्किंग आदि पर अंकुश लगाने हेतु स्थानीय प्रशासन को आवश्यक निर्देश दिए जाएं।
नगर की ट्रैफिक व्यवस्था को बेहतर बनाने हेतु जल्द से जल्द बाईपास निर्माण की दिशा में ठोस कदम उठाए जाएं।

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